क्रमिक मार्ग का परिचय

ऐसा कहा जाता है कि बुद्ध ने 84,000 उपदेश दिए क्योंकि विषय और विस्तार की दृष्टि से उनकी शिक्षाएं बहुत ही विविध और व्यापक थीं। हालाँकि हम विभिन्न सूत्रों का अध्ययन करके बहुत लाभान्वित हो सकते हैं, लेकिन अक्सर इन शिक्षाओं के सार को इतने प्रभावशाली ढंग से समझ पाना कठिन होता है कि वे वास्तविक अर्थ में हमारे लिए लाभकारी सिद्ध हो सकें। यहाँ हम समझने का प्रयास करेंगे कि किस प्रकार भारत और तिब्बत के आचार्यों ने बुद्ध के सम्पूर्ण संदेश को हमारे लिए किस प्रकार एक क्रमिक व्यवस्था, जिसे तिब्बती भाषा में “लाम-रिम” कहा जाता है, में प्रस्तुत किया है। यह क्रमिक मार्ग हमें ज्ञानोदय तक ले जा सकता है।
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