सांख्य और योग दर्शन के मूल सिद्धांत

उद्भव

भारतीय दर्शनशास्त्र के सांख्य दर्शन के प्रवर्तक थे महर्षि कपिल, जिन्होंने सांख्य सूत्र  की रचना की। परन्तु इस सूत्र को केवल 14वीं शताब्दी में ही संकलित किया गया। यद्यपि सांख्य का प्राचीनतम ग्रन्थ है, सांख्य कारिका  जिसकी रचना 5वीं शताब्दी में ईश्वरकृष्ण द्वारा की गई थी। इसका भाष्य वाचस्पति ने 9वीं शताब्दी में लिखा था।

योग दर्शन का आरम्भ कुछ समय पश्चात्, 5वीं शताब्दी के अंत में, पतंजलि द्वारा रचित योग सूत्र  से हुआ। इसका भाष्य 6ठी शताब्दी के आरम्भ में व्यास ने लिखा। इस दर्शन में सांख्य के मूल सिद्धांत तो हैं ही, साथ ही यह परमतत्त्व ईश्वर को भी मानता है, जो शिव के समकक्ष हैं। 

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