Close
Study Buddhism Home
Arrow down
Arrow up
मौलिक तत्व
Arrow down
Arrow up
सार्वभौमिक मूल्य
क्या है...
कैसे करें
ध्यान-साधना
साक्षात्कार
Arrow down
Arrow up
तिब्बती बौद्ध धर्म
Arrow down
Arrow up
बौद्ध धर्म के बारे में
ज्ञानोदय का मार्ग
चित्त साधना
तंत्र
मूल ग्रंथ
आध्यात्मिक गुरुजन
Arrow down
Arrow up
उन्नत अध्ययन
Arrow down
Arrow up
लाम-रिम
चित्त का विज्ञान
अभिधर्म और सिद्धांत प्रणालियाँ
वज्रयान
प्रार्थनाएं और अनुष्ठान
इतिहास और संस्कृति
Arrow down
Arrow up
हमारे बारे में
अद्यतन सामग्री
Arrow down
Arrow up
अंशदान करें
العربية
বাংলা
བོད་ཡིག་
Deutsch
English
Español
فارسی
Français
ગુજરાતી
עִבְרִית
हिन्दी
Indonesia
Italiano
日本語
ខ្មែរ
ಕನ್ನಡ
한국어
ລາວ
Монгол
मराठी
မြန်မာဘာသာ
नेपाली
ਪੰਜਾਬੀ
پنجابی
Polski
Português
Русский
සිංහල
தமிழ்
తెలుగు
ไทย
Türkçe
Українська
اُردو
Tiếng Việt
简体中文
繁體中文
Arrow down
वीडियो
खाता
Enter search term
Search
Search icon
विमुक्ति और ज्ञानोदय
८ लेख
दो सत्यों से चार सत्यों की ओर
आध्यात्मिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनुशीलन किसी आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर दो तरीकों से बढ़ा जा सकता है: निष्ठा के आधार पर – हम इस बात के प्रति निष्ठावान होते हैं कि उस लक्ष्य को हासिल कर पाना सम्भव है। इस निष्ठा के आधार पर आप उस लभ्य को हासिल करने के लिए परिश्रम करते हैं,...
Part
in
यथार्थ: बौद्ध मार्ग और उसके लक्ष्यों का आधार
यथार्थ की अनभिज्ञता
दूसरा आर्य सत्य - दुःख सत्य कारण जिस प्रकार हमने पहले आर्य सत्य को अधिक व्यक्तिगत और ग्राह्य ढंग से समझा, उसी प्रकार हमें अन्य तीन आर्य सत्यों को समझने की आवश्यकता है, ताकि हमारी बौद्ध साधना अधिक सार्थक और रूपांतरकारी रूप में व्यक्तिगत ढंग से हमें प्रभावित सके | जीवन में अपनी...
Part
in
बौद्ध-धर्म को पृथ्वी पर उतारना
मध्यवर्ती तथा उन्नत स्तर की प्रेरणाएं
पुनरावलोकन हमने पूर्व में आध्यात्मिक मार्ग के क्रमिक चरणों के बारे में चर्चा की है जहाँ हम मूलतः अपनी प्रेरणा को एक छोटे दायरे से बढ़ाकर तब तक व्यापक और विस्तृत करते जाते हैं जब तक कि वह पूर्णता को प्राप्त न कर ले। इस प्रकार प्रत्येक स्तर अपने से पिछले स्तर के साथ जुड़ता चला...
Part
in
क्रमिक मार्ग का परिचय
तीसरा आर्य सत्य: दुःख का सत्य निरोध
दुःख सत्य के वास्तविक कारणों के सत्य निरोध के पश्चात किसी भी प्रकार के दुःख सत्य की आवृत्ति नहीं हो सकती।
in
क्रमिक पथ
चौथा आर्य सत्य: सत्य मार्ग
अपने अस्तित्व के बारे में हमारी भ्रांत धारणाओं के समानांतर किसी भी सत्ता का सम्पूर्ण निर्वैचारिक बोध ही हमारे चित्त का वास्तविक मार्ग है जो हमें अपने दुःख सत्यों के वास्तविक कारणों के सत्य निरोध तक पहुँचाता है।
in
क्रमिक पथ
सांख्य और योग दर्शन के मूल सिद्धांत
भारतीय दर्शनशास्त्र के योग दर्शन की मूल युक्तियाँ, जैसे प्रधान, आत्मा एवं मोक्ष, सांख्य दर्शन में भी पाई जाती हैं, परन्तु वह इनको परमतत्त्व ईश्वर से जोड़ता है, जो शिव के समकक्ष हैं।
in
ऐशियाई गैर-बौद्ध परम्पराएं
न्याय और वैशेषिक दर्शन के मूल सिद्धांत
न्याय और वैशेषिक दर्शनों में कई समानताएँ हैं। वैशेषिक दर्शन उन पदार्थों पर बल देता है जो विद्यमान हैं, जबकि न्याय दर्शन ऐसे पदार्थों पर बल देता है जो उन पदार्थों के अस्तित्व को निरूपित एवं प्रमाणित करते हैं।
in
ऐशियाई गैर-बौद्ध परम्पराएं
ज्ञानोदय क्या है?
बौद्ध मार्ग के अनुसरण के अंतिम लक्ष्य, ज्ञानोदय का परिचय।
in
क्या है...
Top