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नैतिक शास्त्र
दस विनाशकारी कृत्यों से कैसे बचें
दस विनाशकारी व्यवहार शैलियों - हमारे दुख का कारण बनने वाले कृत्यों - की पड़ताल, और उनसे बचने के उपाय।
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कर्म और पुनर्जन्म
एक स्वस्थ का समाज का निर्माण
किसी भी समाज का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसके प्रत्येक सदस्य ने स्वस्थ चित्त एवं नैतिकता की भावना को किस प्रकार विकसित किया है। इस बात को ही देख लीजिए कि किस प्रकार विश्व के विभिन्न धर्म अपनी-अपनी नैतिकता प्रणाली के अनुसार आपदाओं से निपटते हैं।
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विभिन्न धर्मों के बीच संवाद
इस्लामी दृष्टिकोण से बौद्ध धर्म
उन मूल बौद्ध अवधारणाओं का एक सिंहावलोकन जिनके कारण इस्लाम को मानने वालों ने बौद्धों को "पुस्तकनिष्ठ लोग" माना - अर्थात वे जो एक उच्चतर सत्ताधारी की नैतिक शिक्षाओं का अनुसरण करते हैं।
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बौद्ध धर्म और इस्लाम
लम-रिम के क्रमिक चरणों द्वारा आत्म-रूपांतरण
लम-रिम, अथवा बौद्ध मार्ग के क्रमिक चरण, हमें साधारण सीमित क्षमता वाले जीवों से पूर्ण ज्ञानोदय प्राप्त बुद्ध की ओर ले जाते हैं।
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क्रमिक पथ
दैनिक जीवन में प्रायोगिक नीति-शास्त्र का सिद्धांत
नीति-शास्त्र का सार है शांति और अहिंसा। इसे कार्यान्वित करने में हमारा ही नहीं अपितु पूरे समाज का हित निहित है।
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सार्वभौमिक मूल्य
नैतिक आत्मानुशासन: कर्म की अप्रतिरोध्यता पर विजय कैसे प्राप्त करें
नैतिक आत्मानुशासन की सहायता से हम अपने कर्म की उस अप्रतिरोध्यता पर विजय पा सकते हैं जिसके कारण हमें सभी प्रकार के दुखों का सामना करना पड़ता है।
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कर्म और पुनर्जन्म
नैतिक आचरण के मूलाधार
बौद्ध नैतिक शास्त्र के तीन मुख्य विषय-क्षेत्र हैं: विनाशकारी व्यवहार से बचने के लिए आत्मानुशासन, रचनात्मक व्यवहार में संलग्न होना, और दूसरों की सहायता करना।
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भावात्मक आरोग्यशास्त्र
समाज सेवा सम्बन्धी बौद्ध नैतिकता
ज्ञान तथा पर-संवेदनशीलता प्रधान सामाजिक या सहायक व्यवसायों में कार्यरत लोगों के लिए बौद्ध नैतिक शास्त्र अत्यंत उपयोगी है।
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भावात्मक आरोग्यशास्त्र
एस.ई.ई. लर्निंग: सार्वभौमिक मूल्यों सम्बंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम
एमोरी विश्वविद्यालय में सार्वभौमिक मूल्यों की शिक्षा के कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण।
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सार्वभौमिक मूल्य
ईमानदारी सार्वभौमिक नैतिक मूल्यों के आधार के रूप में
एक अच्छा मनुष्य होने के लिए, यह आवश्यक है कि हम अच्छे नैतिक मूल्य अपनाएँ | इसका आधार है अपने तथा दूसरों के साथ ईमानदार होना |
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सार्वभौमिक मूल्य
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