सुरक्षित दिशा और बोधिचित्त की पुनःपुष्टि
भूमिका छः प्रारंभिक अभ्यासों में से इस तीसरे अभ्यास की रूपरेखा देते हुए, ग्रंथ कहते हैं कि सर्वप्रथम आप साष्टांग प्रणाम करते हैं, फिर आप बैठते हैं, फिर आप श्वास पर ध्यान केंद्रित करके मन को निर्मल करते हैं, और उसके बाद ही आप शरणागति (सुरक्षित दिशा) और बोधिचित्त की अपनी प्रेरणा...