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आध्यात्मिक गुरु
तंत्र साधकों के लिए सेरकोँग रिंपोछे का उपदेश
"अंशकालिक" तांत्रिक ध्यान साधना के लिए एकांतवास करनाहालाँकि लम्बी अवधि तक की जाने वाली पूर्णकालिक एकांतवास की तंत्र साधनाएं लाभकारी होती हैं, लेकिन अधिकांश लोग इनके लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। इसलिए रिंपोछे कहते थे कि ऐसा सोचना संकीर्ण मानसिकता की निशानी है कि ऐसे एकांतवास...
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त्सेनशाब सेरकोँग रिंपोछे का जीवन परिचय
सेरकोँग रिंपोछे की मृत्यु और उनका पुनर्जन्म
परम पावन दलाई लामा के जीवन को सम्भावित खतरा रिंपोछे की मृत्यु की घटना उनके जीवन काल से भी अधिक विलक्षण और उल्लेखनीय है। जुलाई, 1983 में रिंपोछे ने स्पीति में स्थित ताबो मठ में परम पावन दलाई लामा द्वारा कालचक्र की दीक्षा दिए जाने के कार्यक्रम की व्यवस्था की थी। बाद में रिंपोछे...
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त्सेनशाब सेरकोँग रिंपोछे का जीवन परिचय
दुराचारी आध्यात्मिक गुरुओं से निपटने के लिए दलाई लामा का परामर्श
परम पावन दलाई लामा का यह परामर्श है कि यदि दुराचारी आध्यात्मिक गुरु अपने लापरवाह व्यवहार नियंत्रित नहीं करते हैं तो साधकों को चाहिए कि वे उस दुर्व्यवहार की सूचना दें और यदि आवश्यकता पड़े तो इसे पुलिस में लिखवाएँ।
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बौद्ध धर्म के बारे में मिथ्या धारणाएं
आध्यात्मिक गुरु के साथ सम्बन्ध को प्रभावित करनेवाले कारक
शिष्यों और उनके धर्म गुरुओं के बीच के सम्बन्ध को प्रभावित करनेवाले विभिन्न लक्ष्यों, उपेक्षाओं, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक तथा मनोवैज्ञानिक कारकों का सिंहावलोकन।
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शिष्य-गुरु सम्बंध
इक्कीसवीं शताब्दी में बौद्ध धर्म
दलाई लामा की दृष्टि में 21वीं सदी में बौद्ध होने का अर्थ है असीम परोपकारिता, बोधिचित्त, तथा प्रतीत्यसमुत्पाद पर बुद्ध की शिक्षाओं में अटूट विश्वास बनाए रखते हुए आधुनिक शिक्षा और आधुनिक विज्ञान के बारे में पूर्ण ज्ञान होना।
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आधुनिक समय में बौद्ध धर्म
मेरी गाथा
बर्ज़िन आर्काइव्स के संस्थापक डा. अलेक्ज़ेंडर बर्ज़िन बौद्ध धर्म के अध्ययन और वास्तविक जीवन में उसके अभ्यास के बारे में अपने अनुभव बता रहे हैं।
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डा. अलेक्ज़ेंडर बर्ज़िन
शिक्षकों और अनुवादकों से भी कभी-कभार भूल हो जाती है
शिक्षकों या अनुवादकों द्वारा संयोगवश कुछ गलत कह देने से भ्रान्ति उत्पन्न हो सकती है।
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बौद्ध धर्म के बारे में मिथ्या धारणाएं
किसी आध्यात्मिक गुरु से शिक्षा ग्रहण करना
आध्यात्मिक शिष्य और गुरु के बीच का सम्बंध उन दोनों की योग्यता के स्तर पर निर्भर करता है। यह सम्बंध किसी रोगी और उसके चिकित्सक के बीच के सम्बंध जैसा नहीं होता है।
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बौद्ध धर्म के बारे में मिथ्या धारणाएं
बौद्ध धर्म से जुड़ी सामान्य भ्रांतियाँ
लोगों के बीच तंत्र को लेकर प्रचलित भ्रांतियों के विषय में जानकारी
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बौद्ध धर्म के बारे में मिथ्या धारणाएं
बौद्ध धर्म के प्रति संतुलित दृष्टिकोण
बौद्ध साधना के लिए बौद्धिक, भावनात्मक और धार्मिक दृष्टिकोणों में संतुलन की आवश्यकता होती है।
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बौद्ध धर्म का अध्ययन किस प्रकार करें
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