उपयुक्त आसन, दण्डवत प्रणाम एवं बैठने की मुद्रा
तीसरा प्रारंभिक अनुशीलन है बैठने की व्यवस्था करना, एक सकारात्मक चित्त की अवस्था के साथ किसी सुरक्षित दिशा या शरणावस्था में अष्टांग मुद्रा में बैठना, और अपने बोधिचित्त की पुनः पुष्टि करना। उपयुक्त आसन की व्यवस्था करना ग्रन्थ के अनुसार, यह अत्युत्तम होगा (यदि संभव हो तो) कि...