37 बोधिसत्त्व साधनाएँ - शाब्दिक अनुवाद
लोकेश्वर को श्रद्धांजलि मैं अपने त्रिकाय से सर्वोच्च गुरुओं और संरक्षक अवलोकितेश्वर को सदा सादर प्रणाम करता हूँ, जो दृश्य-प्रपंच को अनादि-अनंत जानते हैं और गामिनों के हितार्थ ही कर्म करते हैं। पूर्ण ज्ञानोदय प्राप्त बुद्धजन, जो हितलाभ एवं आनंद के स्रोत हैं, ज्योति वलयित धर्म...